शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

जॉब कार्ड में धांधली का विरोध करने पर नरेगा प्रभारी की गोली मारकर हत्या

नरेगा मे खुलेआम धांधलियाँ सामने आ रही है जिनमे जाँब कार्ड मे मनमानी,मजदूरों को पूरा मेहनताना ना मिलना शामिल है वैसे तो इस योजना मे बहुत सी अच्छाईयाँ है,पर इसमे पारदर्शिता लाने के प्रयास नाकाफी है ये योजना गांव के कुछ दबंग लोगो के लिये आय का नया स्त्रोत बन गयी है,इसके उदाहरण आए दिनो मिल रहे है
कुछ दिनों पहले ,नरेगा के तहत मजदूरों के जाँब कार्ड न बनाने का विरोध करने पर कांग्रेस नरेगा प्रकोष्ठ के प्रभारी श्रवण कुमार सिंह की घर के बाहर सोते समय गोली मारकर हत्या कर दी गयी यह बात फर्रुखाबाद के दुबरी गांव की है हत्या का मुख्य अभियुक्त (गांव का ही पुर्व प्रधान योगेंद्र उर्फ गुड्डू)पहले भी एक दलित की दिनदहाडे हत्या के जुर्म मे सजा काट चुका है गांव का वर्तमान प्रधान(मात्र नाम का प्रधान) जो कि दलित है,का पूरा काम योगेंद्र उर्फ गुड्डू दबंगई(जबर्दस्ती)से देख रहा था हत्या से पुर्व श्रवण कुमार का योगेंद्र उर्फ गुड्डू से मजदूरों के नाम जाँब कार्ड में न भरने को लेकर विवाद हो गया था वो चाहता था कि मजदूरों का जाँब कार्ड न बने जिससे कि वो मनमानी कर सके जिसका कि श्रवण कुमार नरेगा प्रभारी होने के नाते विरोध कर रहे थे तथा श्रवण कुमार ने इसकी शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों से भी की पर इसका कोई सकारात्मक जबाव नही मिला इसी रंजिश मे श्रवण कुमार को अपनी जान गंवानी पडी



हालाकि जनता के भारी दबाव के कारण पुलिश ने अभियक्तों को गिरफ्तार जरूर कर लिया है,पर योगेंद्र उर्फ गुड्डू जेल मे रहते हुये भी श्रवण कुमार के परिवार को लगातार परेशान कर रहा है उनके परिवार पर अभी भी जानलेवा हमला होते है

मै इस मंच के माध्यम से यह बात आला अफसरो तक पहुंचाना चाहता हूँ खासकर राहुल गांधी तक, क्योकि मुझे यकीन है वे इस मामले को जरूर देखेगे क्योंकि ये मामला सिर्फ श्रवण कुमार या श्रवण कुमार के परिवार का नही है,पूरी नरेगा योजना से जुडा हुया हैजाँब कार्ड से संम्बधित कोई एक पारदर्शक विकल्प तलाशने की जरूरत है मैं यह बात राहुल गांधी तक पहुंचाना चाहता हूँ,पर मुझे कोई ऐसा तरीका नही मालूम कि मै उनसे मिल सकु,इसलिये आप लोग मेरी इसमे मदद करें

गुरुवार, 5 फ़रवरी 2009

'कागजमल के आंसू'......................

दोस्तों आज अनायस ही बचपन की पढ़ी हुई कविता 'कागजमल के आंसू' याद आ गई ! सरकारी स्कूल में छुट्टी के घर वापस आते समय सभी गाते हुए आते थे ! कागज़ है ही ऐसी चीज की उसके वगैर जीवन कल्पना ही नही होती है ! पुराने जमाने के कीमती ग्रन्थ , पुराण , आदि कागज़ की वजह से ही तो हमारे पास है ! कागज़ अपनी अभिव्यक्ति को ज़ाहिर करने का माध्यम है ! 
कागज़ की महिमा ज्यादा क्या बताना, बच्चा बच्चा जानता है ! और समय तथा जगह भी नही है ! कागज़ का सबसे प्रयोग इजिप्ट के निवासियों के द्वारा करीब ३५०० ईसापूर्व किया गया था ! और आज भी बदस्तूर जारी है ! और जारी रहेगा ! जब से कागज़ पर मुद्रा छपने का चलन हुआ तब इसकी अहमियत और बढ़ गई है !
आज यहाँ पर कागज़ का जिक्र करने का मेरा मुख्य उद्देश्य ये है कि हमें कागज़ के सदुपयोग कि कितनी बड़ी जरूरत है ! सभी को पता है कि कागज़ को बनाने के लिए पेड़ों को काटना पड़ता है ! और पेड़ ही हमारे सबसे बड़े मित्र है ! और कागज़ भी जरूरी है ,लेकिन कागज़ का दुरप्रयोग जितना हो रहा है ! उसका सीधा प्रभाव हमारे पर्यावरण यानि हमारे ऊपर पड़ता है ! 
कई ऐसी जगहें है , जहाँ हम कागज़ कि जगह किसी और का उपयोग करके काम चला सकते है ! आज किसी स्कूल में जाते है, तो वहां पर काफी मात्रा में रद्दी पड़ी मिलती है , इसके लिए अध्यापकों को ही पहले बच्चों को कागज़ के उत्पादन के बारे में बताना होगा तथा रद्दी कागज़ को पुनःचक्रित करने की विधि भी सिखानी होगी ! 
कागज़ का दुरप्रयोग स्कूलों से ज्यादा कंपनियों में देखा जा सकता है !
तो कागज़ हमारा दोस्त ,तो हमें भी उससे दोस्ती करनी चाहिए !

रविवार, 25 जनवरी 2009

कुछ बात है की हस्ती मिटती नही हमारी ....

कल गणतंत्र दिवस है ! आज हम स्वतंत्र तथा विश्व के प्रभावशाली देशों की सूची में अहम् स्थान पर है ! हमें भारतीय होने पर गर्व है ! आज हमारे कदम चाँद पर पहुँच चुके है ! इस मौके पर मुझे अमरकवि अवतार सिंह 'पाश ' के चाँद पंक्तियाँ याद आ रही है !
भारत
मेरे सम्मान का सबसे महान शब्द ,
जहाँ कहीं भी प्रयोग किया जाए,
बाकी सभी शब्द अर्थहीन हो जाते है !
ये नही है कि हमारे यहाँ अब राजसत्ता से भ्रष्ठाचार ,नौकरशाहों के कदाचार, घूसखोरी ख़त्म होगई है !काफी है , तथा बढ़ ही रही है ! इसे मिटाना तो हमीं को है ! लेकिन यहाँ मैं उस जिजीविषा की चर्चा करना चाहूँगा, जोकि भारत को जिन्दा बनाए रखती है ! जाने कितने आए कितने गए , लेकिन हमारे सभ्यता जो थी ,वही है ! हाँ कुछ परिवर्तन तो संसार का नियम है ! मुग़ल, अंग्रेज सभी आए !हामारे यहाँ 'स्लमडॉग मिलेनियर' की लाखों कहानियाँ मौजूद है !पर हमारे यहाँ के भूखे, मज़लूम विध्वंस नही करते है ! इसका मतलब ये नही कि हम उनकी सब्र कि सीमा टूटने का इंतज़ार करे ! उन्हें उनके मौलिक अधिकार देने होगे ! यहाँ कविवर नीरज की ये पंक्तियाँ गौर करने के लायक है !
तन की हविश मन को गुनहगार बना देती है ,
बाग़ के बाग़ को बीमार बना देती है !
भूखें पेटों को ओ देशभक्ति सिखाने वालों,
भूंख इन्सान को गद्दार बना देती है !!
मैं इस लेख के माध्यम से इतना कहना चाहता हूँ ! कि भारत में अपने बल पर दुनिया को दिखाने कि ताकत है , और कई बार दिखाई भी है ! इसी देश में मोहन दास पैदा होकर बापू कहलाया !अंत में 'पाश' कि ही चंद पंक्तियाँ दे रहा हूँ ....
।हम लड़ेगे साथी ,
उदास मौसम के लिए ,
हम लड़ेगे साथी,
गुलाम इच्छायों के लिए ,
हम चुनेगे साथी ....
जय हिंद दोस्तों

शनिवार, 3 जनवरी 2009

हम क्या नही कर सकते है......


आज हम क्या नही कर सकते है, २००९ हमारी दम तथा जज्बे की परीक्षा लेने के लिए तैयार खड़ा है ! अब्दुल कलाम के सपने को पूरा करने में ३६५ दिन और कम हो गए है ! आज हम जिस गति से विकास कर रहे है !उसको देखकर हर भारतवासी की आंखों में एक चमक देखी जा सकती है ! १९९८ में जब हम पर तमाम तरीके के प्रतिबंद लगा दिए गए थे, तो हमारा क्या क्या बिगाड़ लिया, एक बात और हुई हम अपनी टेक्नोलोजी पर निर्भर होना सीख गए ! आज हमारे देश की सेलुलर फ़ोन कंपनिया दुनिया में अपना लोहा मनवा रही है ! टाटा पहले ही कोरस का अधिग्रहण करके सावित कर चुकी है ! आज गांव गांव फ़ोन पहुँच गया है ! सूचना प्रोधौगिकी के क्षेत्र में हमे अपनी उपलब्धियों के बारे बताने की जरूरत नही है ! विप्रो, इन्फोसिस, सत्यम आदि नामी कंपनिया हमारे पास मौजूद है !

एक बात और भारत का दिल गांवों में बसता है !गांव में अभी काफी कुछ करना है ,हमें खेती में उत्पादकता बढानी है ! मुख्य बात किसानो को उनका हक़ उन्हें पूरा पूरा मिले ,बस गांव की आर्थिक स्थिति संभलते ही शहरों की तरफ़ पलायन तो रुकेगा ही तथा गांव में भी रौनक आ जायेगी ! ये बात तो है कि आज लोगों को सरकारी व्यवस्थायों तथा तंत्र से विश्वास तो कम हो गया है ! लेकिन हमारे पास दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है ,बस इसे हमको पोजिटिव सोच के जरिये ,आम लोगों के बीच भरोसा जगाना है ! सरकारे भ्रष्ट रही है लेकिन हमारे पास बहुत बड़ी शक्ति है ! नए बर्ष में नई सोच ,प्रसाशन के कुसशन के खिलाफ कोसना नही है ,करना है ,और हम क्या नही कर सकते है ! हम क्या नही कर सकते है !! जय हिंद

 

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